Tuesday, June 23, 2026

मुसाफ़िरनामा 21 June 2026


चलिए ईरान और अमरीका में समझौता हो गया। अगर आपको लगता है कि आने वाले कुछ  सालों में तेल और गैस के दाम कम हो जाएंगे तो बड़े भोले हैं आप। हर लोकतंत्र में सरकार जानती है कि (आपकी) आपदा में (उसका) अवसर या (अफ़सर) कैसे निकलता है। कुछ समय के लिए ही सही ट्रंप को अक्ल तो आई। ईरान के बड़े आका कुछ समय को सुधरे। लेकिन हमारे ज़ेलेंस्की और पुतिन भाई साहब का तीन वर्ष के युद्ध से भी पेट नहीं भरा। वो इसलिए कि आजतक किसी युद्ध में कोई ज़ेलेंस्की या पुतिन नहीं मरा। पूरा विश्व कैसे एक छोटे से समुद्री रास्ते से प्रभावित हो सकता है, आपने देख लिया है। हमारे यहाँ तो विपक्ष (या फिर सरकार के ही) नेताजी लोगों से पूछ लिया जाये कि मलक्का में ऐसा कुछ हो सकता है तो वो बगलें झाँकते मिलेंगे। क्यूँकि जीवनपर्यंत उन्हें बँगले झाँकने के सिवा और कुछ आता भी तो नहीं। गौड़तालाब है कि इजराइल अभी तक नहीं सुधरा। उसने लेबनान पर हमले बंद नहीं किए। इसलिए हॉर्मुज़ में गतिरोध अभी भी बना हुआ है। समझौते के लिए अमरीका ने कितने अरब डॉलर खर्च किए हैं, ये जान लेंगे तो आप ये भी समझ जाएँगे कि बंदरों के हाथ तलवार देने से कितना नुक़सान होता है। वोट देते समय मुसाफ़िर की इस सलाह पर गौर कीजिएगा।

फ्रांस में जी-सात देशों का सम्मेलन हुआ जिसमें बड़े बब्बा फ्रांस के राष्ट्रपति और ट्रम्प से मिले। जोश-जोश में ट्रंप ने युद्ध की स्थिति में भारत का साथ देने का वादा भी किया। काले नाग का वादा सच्चा हो सकता है पर ट्रंप का नहीं इसलिए आप बहकावे में ना ही आयें तो ठीक रहेगा। वैसे बड़े बब्बा को पता है कि ऐसे समय पर कब और किसके साथ फ़ोटो लेनी है। खैर, हमें क्या। हमारे लिखने और आपके पढ़ने से क्या ही बदल जाएगा। व्यापार समझौतों में अधिकतर हथियार समझौते ही होते हैं। देश अगर एक दूसरे के साथ खड़े हो जाएँ तो हथियारों की आवश्यकता ही कहाँ है।

देश में जोड़-तोड़ की राजनीति (फिर से) पराकाष्ठा पर है। शिवसेना के कई विधायक और सांसद अपनी नाव छोड़कर साथ चल रहे (सत्ता के) बड़े जहाज पर सवार हो चुके हैं। दल-बदल विरोधी कानून केवल आम आदमी को समय-समय पर चटाया जाने वाला कानूनी लॉलीपॉप भर है। हमारे यहाँ कानून बनने से कहीं पहले नेताजी लोग कानून की मच्छरदानी में नए-नए छेद ढूँढ लेते हैं। दूसरा दल है तृणमूल कांग्रेस। उसके साथ जो हुआ वो तो फ़िल्मों में खलनायकों के साथ भी नहीं होता।

दक्षिण भारत में मानसून का आगमन हो चुका है। उत्तर भारत में थोड़ा देर होने की आशंका है। जो लोग सोचते हैं की बारिश आने से उनकी मुसीबतें कम हो जाएगी तो काफी चुनमुन टाइप हैं। जो बहुत गरीब है वह बाढ़ में बहेगा, मोटर साइकिल वाला ढक्कन रहित मेनहोल में गिरेगा और अमीर आदमी की बड़ी कॉलोनी में जलभराव के कारण उसका कुत्ता गुम हो जाएगा। नीट की पुनर्परीक्षा सेनाओं की सहायता से हो रही है। आरोप टेलीग्राम पर है, बाबू पर नहीं। अभ्यर्थियों को मुसाफ़िर की शुभकामनाएँ।

मुसाफिर के प्रदेश उत्तराखंड ने अपने आप को शत-प्रतिशत साक्षर घोषित कर दिया है। मुसाफ़िर की मानें तो जितने भी प्रदेश अपने को पढ़ा-लिखा घोषित कर रहे हैं उनकी सड़कों में गड्ढे नहीं होने चाहियें। वहाँ पर दंगे-फ़साद का नाम भी नहीं होना चाहिए। वहाँ पर नदी नालों में जागरूक जनता द्वारा कूड़ा नहीं फेंका जाना चाहिए। वहाँ पर स्कूल, ऑफिस अस्पताल इत्यादि सुचारू रूप से चलने चाहियें। पर ऐसा तो सिर्फ रामराज्य में होता है भाई।

फुटबॉल का महायज्ञ फीफा विश्वकप उत्तरी अमरीका में खेला जा रहा है। जी हाँ, ईरान की टीम भी है। बस ये हम हैं जो क्रिकेट आदि से खुश हैं। ऐसा नहीं है कि हमारे खिलाड़ी किसी से कम हैं, दर्द सिर्फ़ ये है कि हमारे नेता बाबू किसी से किमी नहीं हैं। हर चीज़ का राजनीतिकरण करके सिर्फ़ राजनीति करने वालों को फ़ायदा होता है जनाब। वैसे भी आप आश्वासनों के आम खाइए, यथार्थ के पेड़ मत गिनिए। पेड़ यूँ भी कोई ना कोई मंत्रालय किसी न किसी दिग्गज के लिए ज़मीन ख़ाली करवाने के लिए कटवा ही रहा होता है। मुसाफ़िर को उम्मीद है कि अगले अंक से पहले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से खिंची नसों में आराम आ गया होगा। योग को जीवन का अंग बनायें। एक दिन का ढोंग नहीं। अपनी भाषा, इतिहास और संस्कृति पर गर्व करने से भी स्थति बदलेगी।

जय हिन्द में आस्था पखिये, नमूने अल्पकालिक हैं, देश स्थायी है। 

कर्नल अमरदीप सिंह, सेना मेडल (से.नि)